• उन्नति

    महिला साक्षरता कार्यक्रम

    • 220 से
      अधिक जे जे

      क्लस्टर्स के
      ऊपर किये काम
    • 350 महिला

      साक्षरता केंद्र
    • वर्ष 2018 में

      21000 से
      अधिक लाभार्थी

    जहां तक लक्ष्मी को याद है, वह हमेशा अपने व्यक्तिगत और घरेलू निर्णयों के लिए अपने पति पर निर्भर रहती थी। जल्दी शादी होने की वजह से औपचारिक शिक्षा नहीं ले पाई थी और महिला साक्षरता केंद्र (डब्‍ल्‍यूएलसी) में आने से पहले तक उसे अपनी आत्मनिर्भरता के बारे में पता नहीं था। अब वह पढ़, लिख सकती है और स्वतंत्र होकर यात्रा कर सकती हैं, अंगूठे की जगह अब वह अपना हस्ताक्षर करती हैं और अपने बैंक खाते का संचालन करती है तथा अपने बच्चों को उनकी पढ़ाई में भी मदद कर सकती है।

    लक्ष्मी जैसी कई महिलाएं इस पहल के माध्यम से कार्यात्मक साक्षरता प्राप्त कर रही हैं। शब्दों, संख्या और वाक्य निर्माण को एक अनूठे स्‍पीच-आधारित सॉफ्टवेयर का उपयोग करके पढ़ाया जाता है। इसके अलावा, यह कार्यक्रम इन महिलाओं को वित्तीय रूप से सशक्त बनाता है, क्योंकि कई महिलाएं पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद प्रशिक्षक बनने का विकल्प चुनती हैं।

    आभा, बदलाव की दूत

    • 220 से अधिक

      जे जे क्लस्टर्स के
      ऊपर किये काम
    • 841

      आभा
    • 2 लाख से
      अधिक

      परिवारों पर
      पड़ा असर

    हमारे महिला साक्षरता कार्यक्रम (डब्‍ल्‍यूएलसी) के विस्तार के रूप में आभा कार्यक्रम अस्तित्व में आया। हमारे डब्‍ल्‍यूएलसी कार्यक्रम के माध्यम से समुदाय के कई लाभार्थी हमारे ब्रांड एंबेसेडर्स/बदलाव के दूत बने।

    बदलाव के ये दूत घर-घर जाकर समुदाय में हमारी सीएसआर गतिविधियों, जैसे कि वोकेशनल ट्रेनिंग, मोबाइल डिस्‍पेंसरी के माध्यम से मुफ्त स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं, नशा-मुक्ति शिविरों, छात्रवृति कार्यक्रम आदि के बारे में जागरूकता का प्रसार करती हैं और हमारे कार्यक्रमों से संबंधित पूछताछ के लिए पहला उपभोक्ता संपर्क प्‍वाइंट के तौर पर काम करती हैं। प्रति माह औसतन 10,000 रुपये कमाई कर वे वित्तीय आजादी की राह पर हैं और अन्य महिलाओं के लिए उनकी राह का अनुसरण करने का उदाहरण स्‍थापित कर रही हैं।

    उद्यमिता विकास कार्यक्रम :

    • 292

      सेल्फ हेल्प ग्रुप
    • अभी तक
      1510

      महिलायें प्रशिक्षित
    • 1 करोड़ रुपये

      की आर्थिक
      मूल्य जुड

    अपने पति की आय में सहयोग करने की खातिर सुनीता छोटा-मोटा काम करना शुरू किया लेकिन इसके लिए उसे लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। वह घर से ही काम शुरू करना चाहती थीं, इसलिए उन्होंने अपना खुद का छोटा व्यवसाय शुरू किया, उन्होंने उद्यमिता विकास कार्यक्रम (ईडीपी) के अंतर्गत सिलाई के पाठ्यक्रम में अपना पंजीकरण कराया। कुछ साल के अंदर ही उन्होंने हुनर और औद्योगिक ज्ञान हासिल कर लिया और अब वह अपना स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) चलाती हैं, जिसमें 10 महिलाएं उनके निरीक्षण में काम करती हैं। आज, वह हर महीने करीब 20,000 रुपये कमा रही हैं।

    सुनीता जैसी महिलाओं पर निश्चित रूप से भारत को गर्व है! इस कार्यक्रम के तहत् उन्हें विभिन्न तरह के कौशल जैसे चूड़ी बनाना, चॉकलेट बनाना, सॉफ्ट ट्वॉयज बनाना, जूट का काम, हस्तशिल्प आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है, और उन्हें अपने और अपने परिवार के लिए आय अर्जित करने में सक्षम बनाया जाता हैं। इन उत्पादों की स्थानीय थोक बाज़ारों में जबरदस्त बिक्री होती है।

    वोकेशनल ट्रेनिंग (वीटी) कार्यक्रम

    • 19 व्यावसायिक

      प्रशिक्षण केंद्र
    • वर्ष 2018 में

      7015 लाभार्थी
    • 20 करोड़ रुपये

      की वार्षिक
      आय उत्पन्न हुई

    बृजेश बेरोजगारी की वजह से लंबे समय तक चिंता और अवसाद से ग्रस्त रहे। उन्हें हमारे एक बदलाव दूत आभा द्वारा उनके घर के समीप स्थित वोकेशनल ट्रेनिंग (वीटी) सेंटर में कंप्यूटर प्रशिक्षण कोर्स में पंजीकरण कराया गया। प्रशिक्षण के दौरान उनकी प्रदर्शन और समर्पण ने ना केवल उन्हें आत्मविश्वासी बनने में मदद की, बल्कि उन्हें उसी वीटी सेंटर में नौकरी भी मिल गई। अब वह सालाना 1.25 लाख रुपये कमा रहे हैं और एक साल में 200 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षित कर उनका प्‍लेसमेंट सुनिश्चित कर रहे हैं।

    बृजेश की कहानी हमारे वीटी केंद्र लाभार्थियों की कई सफल कहानियों में से एक है। कई लोगों को कैफे कॉफी डे, शॉपर्स स्‍टॉप, टाटा वेस्‍टसाइड, टाटा कंसल्‍टैंसी सर्विसेज, डिस्ट्रिक्ट कोर्ट आदि में काम करने का अवसर मिला। समुदायों के समीप स्थित इन वीटी केंद्रों में विभिन्न तरह के कौशल विकास कार्यक्रम जैसे इलेक्ट्रिशियन, सिलाई, टेलरिंग, ब्यूटीशियन पर्सनैल्‍टी डेवलपमेंट, मोबाइल रिपेयरिंग, कार्यालय सहायक और रिटेल चेन असिस्‍टेंट चलाए जाते हैं।

    संकल्प : शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ट्यूटोरियल्स कक्षाएं

    • 16 वोकेशनल

      सेंटर्स के लाभार्थी
    • अब तक

      6912

      लाभार्थी
    • वर्ष 2018 में

      1928

      लाभार्थी

    घर पर उचित मार्गदर्शन की कमी के कारण, बच्चों का पढ़ाई पर ध्यान और एकाग्रता कम होती है, जिससे उनके उज्ज्वल भविष्य की संभावनाएं धूमिल होती हैं।

    छात्रों के स्कूल छोड़ने की दर को कम करने और समग्र विकास प्रदान करने के मकसद से कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि के बच्चों के लिए ट्यूटोरियल्स कक्षाएं शुरू की गईं। ये कक्षाएं वर्ग I-X में पढ़ रहे बच्चों को निःशुल्क पूरक शिक्षा प्रदान करने के लिए आयोजित की जाती हैं। इसमें बच्चों को न केवल उनकी पढ़ाई के बारे में मार्गदर्शन प्राप्‍त होता है, बल्कि उन्हें चित्रकला, नाटक, गायन और नृत्य जैसी एक्‍स्‍ट्राकैरिकुलर गतिविधियों में भाग लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है। लाभार्थियों की सुविधा के लिए कक्षाएं झुग्गी झोपड़ी कॉलोनी में हमारे वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर्स में दिए जाते हैं। कार्यक्रम का लाभ यह है कि कवर किए गए छात्रों के बीच स्कूल छोड़ने (ड्रॉपआउट) की दर शून्य है।

    सक्षम : (किशोरावस्था की लड़कियों की काउंसिलिंग)

    • 14

      स्कूल
    • वर्ष 2018 में

      4480

      लड़कियों की
      काउंसलिंग की गई
    • अभी तक

      11,500 से अधिक

      लड़कियों की
      काउंसलिंग हो चुकी है

    अक्सर सांस्कृतिक और सामाजिक बाधाओं के कारण, वंचित समुदायों की लड़कियों के बीच प्रारंभिक वर्षों के दौरान जरूरी अवसर और मार्गदर्शन की कमी देखी जाती है।

    इस अंतर को कम करने के लिए खास तौर पर किशोर लड़कियों के लिए सॉफ्ट स्किल्‍स ट्रेनिंग कार्यक्रम तैयार किए गए हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम में सॉफ्ट स्किल्‍स सत्र जैसे व्यक्तित्व विकास, इंग्लिश स्‍पीकिंग, आत्म-रक्षा और साफ-सफाई जैसे विषय शामिल हैं और पेशेवर काउंसिर्ल्‍स द्वारा मासिक सत्र के माध्यम से इसके बारे में बताया जाता है। कक्षा X-XII तक की लड़कियों को अपने लिए समुचित कॅरियर विकल्प तय करने में मदद के लिए कॅरियर काउंसिलिंग और वन-टु-वन सेशंस भी आयोजित किए जाते हैं। आत्म-मूल्यांकन के आधार पर, 70% से अधिक ने उच्च आत्मविश्वास स्तर के बारे में बताया, 75% ने अंग्रेजी में बातचीत करने का प्रयास करती हैं, 58% से अधिक छात्राएं खुद के बारे में ज्यादा जागरूक हुईं और 40% ने संवाद करने का प्रयास किया।