• लीडरशिप

    संजय कुमार बांगा मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO)

    बिजली उत्पादन और वितरण कारोबार में लगभग तीन दशकों के अनुभवी श्री संजय कुमार बांगा विनियामक शासन के तहत् विश्वसनीयता एवं एटीएंडसी हानि में कमी के लक्ष्य को पूरा करके विद्युत यूटिलिटीज को सुदृढ़ बनाने का व्यापक ज्ञान लेकर आए हैं। भारत में सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की अग्रणी विद्युत यूटिलिटीज के साथ काम करने के दौरान उन्होंने यह ज्ञान अर्जित किया है, जो दिल्ली में बिजली वितरण कारोबार की अपार चुनौतियों से निपटने में उन्हें दक्ष बनाता है।

    श्री संजय कुमार बांगा टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लिमिटेड (टाटा पावर-डीडीएल) में जुलाई 2003 से कार्यरत हैं । श्री बांगा ने कंपनी के शुरुआती दिनों से ही अपनी सेवा से रुग्ण कहे जाने वाले संस्थान को सार्वजनिक और निजी बिजली यूटिलिटीज की अग्रणी कंपनी बनाने में काफी बडा योगदान दिया । उनका मानना है कि योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने की क्षमता ही एक सफल कंपनी को उसके प्रतिस्पर्धी से अलग बनाती है । इसलिए एक प्रभावी लीडर को योजना लागू करने में भी उतना ही शामिल होना चाहिए जितना कि योजना की रणनीति बनाने में ।

    श्री बांगा ने स्नातक करने के बाद अपने कॅरियर की शुरूआत NTPC के साथ बतौर इंजीनियर ट्रैनी के रुप में की और 1989 से 1995 तक सुपर थर्मल पावर परियोजनाओं के परिचालन और उन्हें लागू करने से जुड़े रहे। टाटा पावर-डीडीएल ज्वॉइन करने से पहले श्री बांगा रिलायंस एनर्जी (पूर्व नाम BSES Ltd.) के साथ काम कर रहे थे, वह बिजली उत्पादन गतिविधियों के लगभग सभी क्षेत्रों के साथ जुड़े रहे हैं, जिनमें परिचालन, रखरखाव, योजना, डिज़ाइन और परियोजना इंजीनियरिंग शामिल है। परिचालन टेक्नोलॉजी, परियोजना प्रबंधन, यूटिलिटी बिज़नेस प्रोसेसेस और नियामकीय एन्वॉयरमेंट के ज्ञान की वजह से वे भारत और विदेश में आयोजित होने वाले सेमिनारों/ कार्यशालाओं/समूह परिचर्चा में अक्सर वक्ता के तौर पर शामिल होते हैं।

    श्री बांगा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कुरुक्षेत्र के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने FMS, दिल्ली से MBA की डिग्री ली है। वे भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) LITD 10 कोर कमिटी के भी सदस्य हैं। इस समिति का गठन बिजली प्रणाली के नियंत्रण और कम्युनिकेशंस के लिए मानदंडों को परिभाषित करने के लिए किया गया है। इसके साथ ही वे इंडिया स्मार्ट ग्रिड कार्यबल के भी सक्रिय सदस्य हैं।

    अरूप घोष वरिष्ठ सलाहकार

    चार दशकों से बिजली क्षेत्र के अनुभवी श्री अरूप घोष नवंबर 2015 से टाटा पावर दिल्ली वितरण लिमिटेड [टाटा पावर-डीडीएल] के साथ रहे हैं। उनके पास ट्रांसमिशन और वितरण संचालन, बिजली क्षेत्र का पुनर्गठन और बिजली इकाइयों को नियामकीय नियंत्रण के दायरे में सक्षम बनाने के लिए संस्थागत मजबूती प्रदान करने में अपने खास अनुभव से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने भारत और मॉरिशस की बिजली इकाइयों के साथ मिलकर खास अनुभव हासिल किया जिससे वह दिल्ली में बिजली के कारोबार में मौजूद तमाम चुनौतियों से निपटने और उन्हें सुधारने में सक्षम रहे हैं।

    अब वरिष्ठ सलाहकार के रूप में, वह मुख्य कार्यकारी अधिकारी को सूचना प्रोद्यौगिकी, बिज़नेस डेवलपमेंट, मानव संसाधन, प्रशासन, संपदा प्रबंधन एवं सिविल कार्य के क्षेत्र में परामर्श सेवा प्रदान करते हैं। वह बोर्ड ऑफ द कंपनी में नॉन-एग्जिक्टिव डायरेक्टर के पद पर अपनी सेवाएं देते रहेंगे । अपने सेवानिवृति नवम्बर, 2015 तक, उन्होंने चीफ टेक्निकल ऑफिसर (CTO) एवं एग्जिक्टिव डायरेक्टर के पद पर रहते हुए विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों जैसे परिचालन, इंजीनियरिंग, परियोजनाओं, सामग्री प्रबंधन, मानव संसाधन, व्यवसाय विकास आदि प्रमुख विभागों की जिम्मेदारियां उत्तम तरीके से निभाई । उन्होंने राज्य सरकार की घाटे में चल रही इकाई में बदलाव करने की भयावह चुनौती और उसे वाणिज्यिक रूप से व्यवहार्य स्वतंत्र इकाई बनाने में अपना पूरा सहयोग दिया है जिसके कारण कार्यकुशलता एवं विश्वसनीयता में कंपनी को भारत की बेहतरीन डिसकॉम्स में जाना जाता है । श्री घोष स्वनिर्मित टीम के साथ काम करने वाले शख़्स हैं और उनका दृढ़ विश्वास है कि जवाबदेह लीडरशिप टीम ऐसी होती है, जो कुछ अलग और किसी भी चुनौती का मुकाबला कर सकती है।

    मार्च, 2002 से सितंबर, 2015 के बीच सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड, मॉरिशस के ट्रांसमिशन एवं डिस्ट्रिब्यूशन प्रबंधक (बाद में सलाहकार) के तौर पर श्री घोष सभी T&D मामलों के लिए जिम्मेदार थे जिनमें मैटेरियल्स मैनेजमेंट, मानव संसाधन एवं प्रशासन मुख्य थे। है। इसके साथ ही उन्होंने नियामकीय माहौल का उचित ढंग से सामना करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई के आंतरिक ढांचे में बदलाव करने के प्रयास शुरू किए। उन्होंने मॉरिशस सरकार और बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर ऐसे नए नियम बनाने के काम करने शुरू किये जिनसे यूटिलिटी क्षेत्र के पुनर्गठन को बढ़ावा मिल सके। मॉरिशस में उनके कार्यकाल के दौरान संगठन को बिल्कुल नए सिरे से पुनर्गठित किया गया जिसमें मानव संसाधनों को प्रशिक्षण के बाद नए ढंग से इस्तेमाल करना, T&D बुनियादी ढांचे का भरपूर विस्तार किया, परिचालन को पूरी तरह स्वचालित किया गया और लागत में कटौती एवं कुशलता को नाटकीय ढंग से बढ़ाने के लिए नई प्रणालियां स्थापित की गईं। देश की संसद द्वारा कानूनी ढांचे में जरूरी बदलावों को कानून में जगह देने के लिए मतदान करने के बाद कारोबारी माहौल में भी बदलाव हुआ। मॉरिशस से पहले श्री घोष CESC Ltd. (पूर्व में कलकत्ता इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी लिमिटेड) के साथ मार्च, 1979 से मार्च, 2002 के बीच काम किया। एक ग्रैजुएट इंजीनियर ट्रैनी से लेकर उप महाप्रबंधक के तौर पर अपने 23 वर्षों के सफर के दौरान वह जिम्मेदारियों के बढ़ते स्तर के साथ ट्रांसमिशन और वितरण से संबंधित गतिविधि के लगभग प्रत्येक पहलू से जुड़े रहे हैं।

    CESC से पहले, श्री घोष ने इलेक्ट्रिकल मैन्युफैक्चरिंग उद्योग में पहले नेशनल इंसुलेटेड केबल कंपनी ऑफ इंडिया और बाद क्रॉम्प्टन ग्रीव्ज के साथ 2 साल काम किया।

    श्री घोष भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खडगपुर के छात्र रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने सामान्य प्रबंधन में एडमिनिस्ट्रेटिव स्टॉफ कॉलेज आफ इंडिया, हैदराबाद (MDP), भारतीय प्रबंध संस्थान, कोलकाता (EDP) और जेवियर लेबर रिलेशंस इंस्टीट्यूट जमशेदपुर (EDP) से औपचारिक प्रशिक्षण हासिल किया है। साथ ही उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप्स इंक (IP3) वाशिंगटन DC से नियामकीय मामलों में प्रशिक्षण हासिल किया है।

    श्री सुनील सिंह मुख्य परिचालन अधिकारी (COO)

    श्री सुनील सिंह, टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लिमिटेड के मुख्य परिचालन अधिकारी के साथ ही ऑपरेशंस एवं सेफ्टी विभाग के प्रमुख भी हैं। श्री सिंह की मुख्य जिम्मेदारियों में पावर सिस्टम कंट्रोल, नेटवर्क इंजीनियरिंग, निरीक्षण एवं गुणवत्ता क्वालिटी अशुअरॅन्स तथा ज्योग्राफिकल इन्फार्मेशन सिस्टम के साथ ही टेक्निकल इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स (स्पेसिफिकेशन्स फार्मूलेशन, EHV एवं वितरण स्तर पर परियोजना का क्रियान्वयन), पूरे टाटा पावर-डीडीएल में संपूर्ण नेटवर्क परिचालन एवं उसका रखरखाव, सुरक्षा, एनर्जी ऑडिट, निरीक्षण एवं गुणवत्ता आश्वासन के साथ ही कॉरपोरेट परिचालन सेवाओं के माध्यम से नए उत्पादों को क्रियान्वित करना शामिल हैं।

    श्री सिंह IIT (रूड़की) के पूर्व छात्र रहे हैं और उनके पास बिजली वितरण के क्षेत्र में काम करने का तीन दशक से भी ज्यादा का अनुभव है। उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण परिचालन में उनके पास व्यापक ज्ञान है। जटिल विद्युतीय वितरण समस्याओं को दूर करने के लिए तकनीकी समाधान प्रदान करने में उनकी गहरी रुचि है। वह निष्पादन विशेषज्ञ और परिणाम उन्मुख टीम लीडर हैं। उन्होंने बिज़नेस प्रोसेस रीइंजीनियरिंग, मैनपावर रीअलाइनमेंट एवं ऑटोमेशन ऍप्लिकेशन्स के प्रभावी उपयोग के माध्यम से कैपेक्स एवं ओपैक्स अनुकूलन में अग्रणी भूमिका अदा की है। वर्तमान में वह टाटा पावर-डीडीएल (आउटसोर्स मैनपावर सहित) के कुल मैनपावर के करीब 60 % का नेतृत्व कर रहे हैं। वह अपने काम के प्रति जुनूनी और एक प्रेरणादायी टीम लीडर हैं। इसके अलावा, वह विभिन्न निगोशीएशन समितियों का भी हिस्सा हैं, जिसके परिणामस्वरूप गुणवत्ता पहलू से समझौता किए बगैर लागत में काफी कमी आई है।

    उन्होंने 2004 में उस समय टाटा पावर-डीडीएल ज्वॉइन किया था जब AT&C हानियां 45% के आसपास थी। उन्होंने कंपनी में डिस्ट्रिक्ट मैनेजर एवं सर्किल हेड सहित विभिन्न पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं। सब-अर्बन सर्किल (मुख्य रूप से टाटा पावर-डीडीएल परिचालन के ग्रामीण इलाकों में सेवा प्रदान करना) में बतौर सर्किल हेड अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने इन इलाकों में AT&C हानि को कम कर बेंचमार्क प्रदर्शन मानदंड कायम किया। उनके नेतृत्व में संगठन ने हानि को कम कर 10% से नीचे लाकर एक नया बेंचमार्क स्थापित किया, जबकि इस स्तर को हासिल करना भारतीय बिजली परिदृश्‍य में दुर्लभ है।

    श्री सिंह उपभोक्ताओं को विश्व-स्तरीय सेवाएं प्रदान करने के लिए इनोवेटिव तकनीकों के उपयोग के लिए नया बेंचमार्क कायम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। गुणवत्तापूर्ण बिजली की आपूर्ति एवं विश्वसनीयता सूचकांक में सुधार करने जैसे क्षेत्रों पर भी उनका मुख्य ध्यान हैं। AT&C हानि को कम करना भी उनकी प्राथमिकता सूची में ऊपर है।